Ipc 380 in hindi. IPC 447, 448, 449, 450, 451, 452, 453, 454, 455, 456, 457, 458, 459, 460, 461, 462 of Indian Penal Code 2019-02-11

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Section 377 of the Indian Penal Code

ipc 380 in hindi

A case cannot be compromised in a matter of a day. युवती के वकील ने आरोपी की याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उसने शादी का वादा करके युवती से शारीरिक संबंध बनाए, इसलिए इसे रेप माना जाए. They inhere in the right to life. भारतीय दण्ड संहिता, 1860 का यह नवम् संस्करण पूर्णतः नए कलेवर, साज-सज्जा व अधुनातन परिवर्तनों को शामिल करते हुए प्रस्तुत किया जा रहा है। इस अंक में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम- 2000 द्वारा अन्तःस्थापित तथा प्रतिस्थापित धारा परिवर्तनों को सम्मिलित करते हुए उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालय के महत्त्वपूर्ण विनिश्चयों को भी स्थान दिया गया है। पाठ्य सामग्री को और अधिक उपयोगी बनाने की दृष्टि से दण्ड प्रक्रिया संहिता संशोधन अधिनियम तथा दण्ड संहिता के संदर्भ में प्रादेशिक स्तर पर होने वाले कानूनी बदलाव पर ख़ास ध्यान दिया गया है। धारावाही क्रम में लिखी गई ये पुस्तक विशद् टिप्पणियों, उदाहरणों, सारगर्भित विवेचनाओं से युक्त है, भाषा-शैली पहले के मुक़ाबले अधिक सरल व बोधगम्य है। निःसंदेह देवनागरी लिपि में लिखी ये पुस्तक हिन्दी विधि जगत से जुड़े प्राध्यापकों, प्रतियोगी छात्रों के साथ-साथ न्यायालयी कार्यों से संबंध रखने वाले तमाम लोगों के लिए लाभप्रद और बहुपयोगी सिद्ध होगी। Indian Penal Code in Hindi is an established work by a renowned author. . Important topics like abetment, conspiracy, culpable homicide, murder, kidnapping, robbery, theft, breach of trust in light of recent decisions of the various High Courts and Supreme Court have been discussed.

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धारा 370 पर बवाल क्यों?

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Since nobody had been prosecuted in the recent past under this section it seemed unlikely that the section would be struck down as illegal by the Delhi High Court in the absence of a petitioner with standing. You need to follow a step by step approach. Still this is what you must do:- 1. That means the trial court can't close the case on the basis of compromise. We use cookies to ensure that we give you the better experience on our website.

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Section 380 in The Indian Penal Code

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According to the , in 2015, 1,491 people were arrested under Section 377, including 207 minors 14% and 16 women. आपसी सहमति से बना संबन्ध बलात्कार नहीं है? People cannot consider themselves to be exclusive of a society. भाजपा धारा 370 को संविधान निर्माताओं की ग़लती मानती है. विशेष अधिकार धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है. Enter into compromise with the complainant and then file an application before the Trial Court to get the compoundable offences compounded. इस अपराध के अलग-अलग हालात और श्रेणी के हिसाब से इसे धारा 375, 376, 376क, 376ख, 376ग, 376घ के रूप में विभाजित किया गया है. In May 2008, the case came up for hearing in the Delhi High Court, but the Government was undecided on its position, with The Ministry of Home Affairs maintaining a contradictory position to that of The Ministry of Health on the issue of enforcement of Section 377 with respect to homosexuality.

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धारा 370 पर बवाल क्यों?

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की में परिभाषित की गई है। में इसका विस्तार से उल्लेख है। यह एक संज्ञेय या काग्निज़बल अपराध है, मतलब यह कि शिकायत होने पर पुलिस इस पर तुरंत संज्ञान ले कर आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है और इस अपराध के गैर-जमानती होने के कारण तुरंत जमानत नहीं मिल सकती है। इस धारा के अंतर्गत दोषीं सिद्ध होने पर तीन वर्ष तक का कारावास या जुर्माना या दोनों से सजा का प्रावधान है। आई. Eventually, in a historic judgement delivered on 2 July 2009, Delhi High Court overturned the 150-year-old section, legalising consensual homosexual activities between adults. As the case prolonged over the years, it was revived in the next decade, led by the , an activist group, which filed a in the in 2001, seeking legalisation of homosexual intercourse between consenting adults. उसने उसके खिलाफ रेप, धोखाधड़ी समेत कई मामलों में केस दर्ज कराया. इस दौरान उन दोनों बीच यौन संबंध भी बने. What is the punishment for the crime? If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on the Navbharat Times website.

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IPC 380 in Hindi

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About The Owner Hey Smart Visitors. हालांकि एक अन्य हाइकोर्ट ने महिला के कौमार्य को उसकी संपत्ति का दर्जा दिया था लेकिन बॉम्बे हाइकोर्ट इस बात से सहमत नहीं है. He further went on to state that the majoritarian concept does not apply to Constitutional rights and the courts are often called upon to take what may be categorized as a non-majoritarian view, in the check and balance of power envisaged under the Constitution of India. ! Non bailable Imprisonment for 3 years with fine. In March 2016, Tharoor tried to reintroduce the private member's bill to decriminalize homosexuality, but was voted down for the second time. पूर्वान्चल विष्वविद्यालय, जौनपुर से सम्दद्ध तिलकधारी स्नातकोत्तर महरविद्यालय, जौनपुर के विधि संकाय में एक लम्बे समय से उपाचार्य रीडर के रूप में कार्यरत हैं और एक सफल तथा सर्वप्रिय प्राध्यापक हैं। भारत सरकार विधि, न्याय और कम्पनी कार्य मंत्रालय के विधायी विभाग द्वारा डाॅ. Over time, she gained the courage to come out and challenge Section 377.

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Section 406/420/467/468/471/34 of IPC

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On 24 August 2017, the Supreme Court upheld the right to privacy as a fundamental right under the Constitution in the landmark judgement. भारत के उच्चतम न्यायलय के आदेश जम्मू - कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते हैं । 6. विवरण जो भी कोई ऐसे किसी इमारत, तम्बू या जलयान, जो मानव निवास या संपत्ति की अभिरक्षा के लिए उपयोग में आता हो, में चोरी करता है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और साथ ही आर्थिक दंड से दंडित किया जाएगा। लागू अपराध इमारत, तम्बू या पोत में चोरी करना सजा - सात वर्ष कारावास + आर्थिक दंड। यह एक गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध है और किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। यह अपराध समझौता करने योग्य नहीं है। LawRato. हर स्थिति में लागू होता है यह कानून — उपधारा 2 के अन्तर्गत बताया गया है कि कोई पुलिस अधिकारी या लोक सेवक अपने पद और शासकीय शक्ति और स्थिति का फायदा उठाकर उसकी अभिरक्षा या उसकी अधीनस्थ महिला अधिकारी या कर्मचारी के साथ संभोग करेगा, तो वह भी बलात्कार माना जाएगा. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. Imprisonment for 2 years and fine. However, you can change your cookie settings at any time.

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457 INDIAN PENAL CODE

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The Indian Health Ministry supported this petition, while the Home Ministry opposed such a move. की धारा 380 से जुड़ा समाचार जो सुर्खियों में रहा : 1. Discrimination against an individual on the basis of sexual orientation is deeply offensive to the dignity and self-worth of the individual. यदि स्त्री 16 वर्ष से कम उम्र की है तो उसकी सहमति या बिना सहमति के होने वाला सम्भोग भी बलात्कार है. जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है । 2. On 27 March 2012, the Supreme Court reserved verdict on these.


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IPC 447, 448, 449, 450, 451, 452, 453, 454, 455, 456, 457, 458, 459, 460, 461, 462 of Indian Penal Code

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गोस्वामी ने बताया कि अगर किसी के साथ कोई मार-पीट करता है, तो पीड़ित को पहले एमएलसी करा लेनी चाहिए जिससे जब कोर्ट में शिकायत की जाए तो सबूत के तौर पर मेडिकल लीगल सर्टिफिकेट एमएलसी लगाया जा सके। एमएलसी मार-पीट के बाद किसी भी डॉक्टर से कराई जा सकती है। - अगर साधारण मार-पीट के दौरान कोई किसी को घातक हथियार से जख्मी करता है, तो यह मामला आईपीसी की धारा-324 के तहत आता है। ऐसे मामले में शिकायती के बयान के आधार पर पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज करती है। आरोपी अगर दोषी करार दिया जाता है तो उसे अधिकतम तीन साल कैद हो सकती है। यह अपराध गैरजमानती और गैरसमझौतावादी है। साथ ही संज्ञेय भी है। बाद में अगर दोनों पक्षों में समझौता भी हो जाए तो भी एफआईआर कोर्ट की इजाजत से ही खत्म हो सकती है। - अगर कोई शख्स किसी को गंभीर चोट पहुंचाता है तो आईपीसी की धारा-325 के तहत केस दर्ज होता है। यह मामला भी संज्ञेय है लेकिन समझौतावादी है। साथ ही यह जमानती अपराध भी है। - अगर कोई शख्स किसी घातक हथियार से किसी को गंभीर रूप से जख्मी कर दे तो आईपीसी की धारा-326 के तहत केस दर्ज होता है। किसी को चाकू मारना, किसी अंग को काट देना या ऐसा जख्म देना जिससे जान को खतरा हो जैसे अपराध इसी कैटिगरी में आते हैं। क्रिमिनल लॉयर अजय दिग्पाल ने बताया कि अगर किसी के साथ मार-पीट कर कोई हड्डी या दांत तोड़ दे तो भी धारा-326 के तहत ही केस दर्ज होता है। यह गैरजमानती और गैर समझौतावादी अपराध है। दोषी पाए जाने पर 10 साल की कैद या उम्रकैद तक हो सकती है। - अगर किसी पर कोई उसकी जान लेने की नीयत से हमला करता है, तो आरोपी पर आईपीसी की धारा-307 हत्या का प्रयास का केस दर्ज होता है। इसमें दोषी पाए जाने पर उम्रकैद तक हो सकती है। - अगर कोई शख्स किसी पर अटैक करे और इस कारण जान को खतरा हो जाए लेकिन आरोपी की नीयत जान लेने की न हो तो गैर इरादतन हत्या का प्रयास यानी आईपीसी की धारा-308 के तहत केस दर्ज हो सकता है। दोषी पाए जाने पर अधिकतम सात साल कैद हो सकती है।. गिरफ्तारी के डर से युवक ने हाईकोर्ट की शरण ली. ट्रेनों के आरक्षित कोचों में चोरी के मामले में धारा 380 के तहत मामला दर्ज करने के आदेश मिले हैं जोकि पहले धारा 379 के तहत मामले दर्ज होते थे। रिजर्व कोचों में चोरी की वारदात होने पर अब धारा 380 के तहत मामले दर्ज होने लगे हैं। इस धारा के तहत आरोपी और फरियादी के बीच समझौता नहीं हो सकता। साथ ही इस धारा में सात साल तक की सजा का प्रावधान है। ध्यान दें: यहाँ पर ऊपर दिया गया उदाहरण केवल भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और किए गए अपराधों के तालमेल को समझने के लिए दिया गया है और इसी लिए उदाहरण को चर्चित समाचार के माध्यम से बताने की चेष्ठा की गई है। साक्ष्य के रूप में उन समाचारों के लिंक को उपर प्रस्तुत किया गया है जो उदाहरण के लिए प्रयोग किए गए है। अतः यह उदाहरण मन गढ़ंत नहीं है।. इस सभी स्थितियों में आरोपी को सजा हो सकती है. High Court is not the last court in the country, Supreme Court is.

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The Supreme Court judgment thus criminalises the personal behaviour of consenting adults. The Court held that amending or repealing section 377 should be a matter left to Parliament, not the judiciary. चतुर्वेदी पठन-पाठन और लेखन कार्य में सक्रिय हैं। विधि की विभिन्न षाखाओं में संवैधानिक विधि, दण्ड-विधि, अपराध-षास्त्र और अपराध-प्रषासन तथा अपकृत्य विधि इनके प्रिय विषय हैं। इनका लक्ष्य और उद्देष्य अध्ययन, अध्यापन और लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्टता तथा उच्च स्तर को बनाये रखना है और इसी सिद्धान्त के अनुरूप जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में कार्य करना उनका विष्वास और प्रयत्न है। अध्याय 1: प्रस्तावना अध्याय 2: साधारण स्पष्टीकरण अध्याय 3: दडों के विषय में अध्याय 4: साधारण अपवाद अध्याय 5: दुष्प्रेरण के विषय में अध्याय 6: राज्य के विरुद्ध अपराधों के विषय में अध्याय 7: सेना, नौसेना और वायुसेना से सम्बन्धित अपराधों के विषय में अध्याय 8: लोक प्रशान्ति के विरुद्ध अपराधों के विषय में अध्याय 9: लोक सेवकों द्वारा या उनसे सम्बन्धित अपराधों के विषय में अध्याय 10: लोक सेवकों के विधिपूर्ण प्राधिकार के अवमान के विषय में अध्याय 11: मिथ्या साक्ष्य और लोक न्याय के विरुद्ध अपराधों के विषय में अध्याय 12: सिक्कों और सरकारी स्टाम्पों से सम्बन्धित अपराधों के विषय में अध्याय 13: बाटों और मापों से सम्बन्धित अपराधों के विषय में अध्याय 14: लोक-स्वास्थ्य, क्षेम, सुविधा, शिष्टता और सदाचार पर प्रभाव डालने वाले अपराधों के विषय में अध्याय 15: धर्म से सम्बन्धित अपराधों के विषय में अध्याय 16: मानव शरीर पर प्रभाव डालने वाले अपराधों के विषय में अध्याय 17: सम्पत्ति के विरुद्ध अपराधों के सम्बन्ध में अध्याय 18: दस्तावेजों और सम्पत्ति के विषय में अध्याय 19: सेवा संविदाओं के आपराधिक भंग के विषय में अध्याय 20: विवाह सम्बन्धी अपराधों के विषय में अध्याय 21: मानहानि के विषय में अध्याय 22: आपराधिक अभित्रास, अपमान और क्षोभ के विषय में अध्याय 23: अपराधों को करने के प्रयत्नों के विषय में. यदि कोई, किसी निवास स्थान जोकि तम्बू, जहाज या किसी भी परिसर में कोई चोरी जिसे में परिभाषित किया गया है। करेगा, उसे सात वर्ष तक का कारावास और जुर्माना हो सकता है। यह अपराध संज्ञय है अथार्त पुलिस इसका तुरंत संज्ञान ले सकती है और आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है। या अपराध गैर-जमानती और असमझौतावादी है। आई. The Naz Foundation worked with a legal team from the to engage in court.

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हाल ही में एक ऐसा मसला सामने आया जिसमें एक महिला ने अपने प्रेमी पर यह आरोप लगाया कि शादी का झांसा देकर वह एक लंबे समय तक उसके साथ बलात्कार करता रहा. तब युवक ने उस पर गर्भपात के लिए दबाव डाला. धारा 370 की वजह से कश्मीर में बाहर के लोग जमीन नहीं खरीद सकते है। We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. उसने कई बार उस युवक की आर्थिक मदद भी की. Those perceived by the majority as 'deviants' or 'different' are not on that score excluded or ostracised. Section 2:- Punishment of offences committed within India — Every person shall be liable to punishment under this Code and not otherwise for every act or omission contrary to the provisions thereof, of which he shall be guilty within India. हमारी रिफंड और कैंसलेशन पालिसी देखे.


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